आज, 31 मार्च 2025, भारतीय रेलवे ने देश की पहली हाइड्रोजन-ईंधन वाली ट्रेन का ट्रायल रन शुरू कर दिया है। यह ट्रेन हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर 89 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और इसकी अधिकतम गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
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हाइड्रोजन ट्रेन की विशेषताएँ
- पावर और क्षमता:
इस हाइड्रोजन ट्रेन में 1,200 हॉर्स पावर (HP) की क्षमता वाला इंजन है, जो इसे अन्य देशों की हाइड्रोजन ट्रेनों से दोगुना शक्तिशाली बनाता है। अधिकांश अंतरराष्ट्रीय हाइड्रोजन ट्रेनों में 500 से 600 HP तक की क्षमता होती है। - पर्यावरण के अनुकूल:
यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के संयोजन से बिजली उत्पन्न करती है, जिससे केवल जल वाष्प का उत्सर्जन होता है। यह शून्य-उत्सर्जन परिवहन समाधान प्रदान करती है। - यात्री क्षमता:
ट्रेन में कुल 10 कोच होंगे, जिसमें से 8 पैसेंजर कोच होंगे, और एक बार में यह 2,638 यात्रियों को ले जा सकती है।
वित्तीय और तकनीकी पहल
रेल मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए वित्त वर्ष 2023-24 में 2,800 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जिसके तहत कुल 35 हाइड्रोजन ईंधन-सेल आधारित ट्रेनों का विकास किया जाएगा। इस परियोजना का निर्माण चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा किया जा रहा है।
भविष्य की योजनाएँ
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस पहल के माध्यम से भारतीय रेलवे वैकल्पिक ऊर्जा संचालित यात्रा में एक नई दिशा में कदम रख रहा है। यदि ट्रायल सफल रहता है, तो इसे नियमित संचालन में लाया जाएगा और अन्य रूट्स पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- क्या यह ट्रेन अन्य देशों की हाइड्रोजन ट्रेनों से अलग है?
हाँ, भारत की हाइड्रोजन ट्रेन की पावर कैपेसिटी अन्य देशों की तुलना में दोगुनी है। - क्या यह ट्रेन पर्यावरण के लिए सुरक्षित है?
जी हाँ, यह पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है और इसका उत्सर्जन केवल जल वाष्प होता है। - क्या अन्य रूट्स पर भी हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की योजना है?
हाँ, यदि ट्रायल सफल होता है, तो इसे अन्य छोटे रूट्स पर भी चलाने की योजना बनाई जा रही है।
यह कदम भारतीय रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा और ग्रीन मोबिलिटी के क्षेत्र में भारत को अग्रणी देशों में शामिल करेगा।