MP के कॉलेजों में 10 भाषाओं की पढ़ाई! छात्रों को नया बदलाव

मध्य प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जिसमें राज्य के कॉलेजों में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और उर्दू के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं जैसे बंगाली, मराठी, तेलुगु, तमिल, गुजराती और पंजाबी को भी शामिल किया गया है। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत लिया गया है और मध्य प्रदेश इस बदलाव को अपनाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

नई शिक्षा नीति के मुख्य पहलू

  1. भाषाई विविधता:
    • छात्रों को विभिन्न भारतीय भाषाओं में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी भाषाई क्षमता और सांस्कृतिक जुड़ाव में वृद्धि होगी।
    • हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और उर्दू के अलावा बंगाली, मराठी, तेलुगु, तमिल, गुजराती और पंजाबी जैसी भाषाएं शामिल हैं।
  2. सांस्कृतिक समृद्धि:
    • इस पहल से मध्य प्रदेश भाषाई विविधता का केंद्र बनेगा, जो देश भर में बहुभाषी संस्कृति को बढ़ावा देगा।
    • उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने इसे भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
  3. शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार:
    • इस निर्णय से न केवल राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि यह छात्रों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर भी प्रदान करेगा।
    • यह कदम राज्य के विश्वविद्यालयों को भाषाई विविधता का केंद्र बनाने में मदद करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • क्या मध्य प्रदेश में यह बदलाव पहली बार हो रहा है?
    हाँ, मध्य प्रदेश इस बदलाव को अपनाने वाला देश का पहला राज्य है।
  • कौन सी भाषाएं शामिल की गई हैं?
    हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू के अलावा बंगाली, मराठी, तेलुगु, तमिल, गुजराती और पंजाबी भाषाएं शामिल की गई हैं।
  • इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य छात्रों को भाषाई विविधता का ज्ञान देना और राज्य को भाषाई विविधता का केंद्र बनाना है।

Leave a Comment