भारत में 6G सर्विस की तैयारी जोरों पर है, और केंद्रीय संचार राज्य मंत्री चन्द्र शेखर पेम्मासानी ने जानकारी दी है कि इसे 2030 तक लॉन्च किया जाएगा। इस समय भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और चीन जैसे देशों के साथ मिलकर 6G टेक्नोलॉजी के विकास में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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6G सर्विस की विशेषताएँ
- स्पीड:
6G तकनीक की स्पीड 5G से 100 गुना अधिक होगी, जिससे मोबाइल इंटरनेट डेटा की स्पीड 1 टेराबिट प्रति सेकंड (Tbps) तक पहुंचने की उम्मीद है। - कम लेटेंसी:
यह तकनीक 100 माइक्रोसेकंड तक की लेटेंसी प्रदान करेगी, जिससे रीयल-टाइम कनेक्टिविटी संभव होगी। - नया स्पेक्ट्रम:
6G मौजूदा MHz या GHz स्पेक्ट्रम बैंड पर नहीं चलेगा; इसके लिए नया टेट्राहर्ट्ज (THz) स्पेक्ट्रम बैंड आवश्यक होगा।
भारत में विकास और परीक्षण
भारत ने पहले ही 6G टेक्नोलॉजी के लिए टेस्ट बेड स्थापित कर लिया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने 6G टेक्नोलॉजी इनोवेशन ग्रुप (6G-TIG) का गठन किया है, जो इस तकनीक के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा।
लॉन्च की योजना
- लॉन्च तिथि:
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत 2030 तक 6G सर्विस को लॉन्च करने की योजना बना रहा है। - अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा:
भारत इस क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में से एक बनने का प्रयास कर रहा है।
वर्तमान स्थिति
भारत ने पहले ही 5G सर्विस को 2022 में लॉन्च किया था, और अब लगभग सभी जिलों में इसका नेटवर्क स्थापित हो चुका है। एयरटेल, जियो और BSNL जैसी कंपनियाँ इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- क्या भारत में 6G सर्विस अन्य देशों से पहले लॉन्च होगी?
हाँ, भारत इस तकनीक को लॉन्च करने में दुनिया के पहले देशों में से एक बनने का लक्ष्य रखता है। - क्या 6G तकनीक स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव नहीं डालेगी। - क्या मैं अपने वर्तमान डिवाइस पर 6G का उपयोग कर सकूँगा?
नहीं, 6G के लिए नए उपकरणों की आवश्यकता होगी जो THz स्पेक्ट्रम का समर्थन करते हों।
यह कदम भारत को वैश्विक टेलीकॉम क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।