भारत में हाइपरलूप टेक्नोलॉजी: IIT मद्रास की पहल
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास ने भारत का पहला हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक सफलतापूर्वक पूरा किया है, जो 410-422 मीटर लंबा है। यह परियोजना भारतीय रेलवे और IIT मद्रास की अविष्कर हाइपरलूप टीम के सहयोग से विकसित की गई है। हाइपरलूप एक उच्च गति परिवहन प्रणाली है जो कम दबाव वाले ट्यूबों के माध्यम से यात्रा करने की योजना है, जिससे वायुरोध और घर्षण कम होता है।
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हाइपरलूप कैसे काम करता है?
- कम दबाव वाले ट्यूब:
- हाइपरलूप प्रणाली में यात्री या माल वाले पॉड्स को वैक्यूम-सील्ड ट्यूबों में रखा जाता है, जिससे वायुरोध और घर्षण लगभग शून्य हो जाता है।
- यह प्रणाली मैग्नेटिक लेविटेशन का उपयोग करती है, जिससे पॉड्स ट्यूब के अंदर बिना घर्षण के तेजी से चलते हैं।
- उच्च गति:
- हाइपरलूप प्रणाली 1,000 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति प्राप्त कर सकती है, जो बुलेट ट्रेनों से भी तेज है।
- यह प्रणाली ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण अनुकूल है, क्योंकि यह बिजली से चलती है और शून्य उत्सर्जन करती है।
भारत में हाइपरलूप की योजनाएं
- मुंबई-पुणे कॉरिडोर:
- भारत में पहला पूर्ण पैमाने पर हाइपरलूप प्रणाली मुंबई-पुणे कॉरिडोर में स्थापित की जाएगी, जिससे यात्रा समय 25 मिनट तक घट जाएगा।
- यह परियोजना भारत के परिवहन नेटवर्क को और अधिक टिकाऊ और कुशल बनाएगी।
- दिल्ली-जयपुर:
- हाइपरलूप के जरिए दिल्ली से जयपुर की यात्रा भी महज 30 मिनट में संभव हो सकती है।
- यह प्रणाली भीड़ और प्रदूषण को कम करने में मदद करेगी।
FAQs
- हाइपरलूप की गति कितनी हो सकती है?
- हाइपरलूप प्रणाली 1,100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति प्राप्त कर सकती है, जो बुलेट ट्रेनों से भी तेज है।
- क्या हाइपरलूप पर्यावरण अनुकूल है?
- हां, हाइपरलूप बिजली से चलता है और शून्य उत्सर्जन करता है, जिससे यह पर्यावरण अनुकूल है।
- भारत में हाइपरलूप का पहला पूर्ण पैमाने पर प्रोजेक्ट कहां होगा?
- भारत में पहला पूर्ण पैमाने पर हाइपरलूप प्रोजेक्ट मुंबई-पुणे कॉरिडोर में स्थापित किया जाएगा।