Ola-Uber-Rapido बाइक टैक्सी बैन: नियमों का उल्लंघन या सुरक्षा चिंता?

कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला: बाइक टैक्सी सेवाओं पर अस्थायी रोक

कर्नाटक हाई कोर्ट ने ऐप-आधारित बाइक टैक्सी सेवाओं, जैसे ओला, उबर और रैपिडो, पर अस्थायी रूप से रोक लगाने का आदेश दिया है। यह फैसला तब तक लागू रहेगा जब तक राज्य सरकार मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत स्पष्ट दिशानिर्देश जारी नहीं करती। कोर्ट ने कंपनियों को छह सप्ताह का समय दिया है ताकि वे आवश्यक बदलाव कर सकें।

मुख्य बिंदु

  1. फैसले का कारण:
    • बाइक टैक्सी सेवाओं के लिए स्पष्ट नियमों की अनुपस्थिति।
    • गैर-परिवहन व्हाइट नंबर प्लेट वाली बाइक का व्यावसायिक उपयोग, जो मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है।
    • ऑटो-रिक्शा यूनियनों द्वारा विरोध और सुरक्षा चिंताएं।
  2. अस्थायी रोक:
    • कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी बाइक टैक्सी सेवाएं छह सप्ताह के भीतर बंद कर दी जाएं।
    • राज्य सरकार को इस अवधि में नियामक ढांचा तैयार करने का समय दिया गया है।
  3. प्रभावित कंपनियां:
    • रैपिडो, ओला, और उबर जैसी कंपनियां इस फैसले से प्रभावित हुई हैं।
    • रैपिडो ने अपने लाखों ड्राइवरों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी उपाय अपनाने की बात कही है।
  4. इतिहास:
    • जुलाई 2021 में कर्नाटक सरकार ने इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी योजना शुरू की थी, लेकिन इसे बाद में वापस ले लिया गया।
    • अन्य राज्यों जैसे दिल्ली और महाराष्ट्र ने बाइक टैक्सियों के लिए नियम बनाए हैं, लेकिन कर्नाटक में अब तक कोई स्पष्ट नीति नहीं है।

अगले कदम

  • नियमों की आवश्यकता:
    राज्य सरकार को मोटर वाहन अधिनियम के तहत दिशानिर्देश तैयार करने होंगे, जिसमें लाइसेंसिंग और परिचालन शर्तें शामिल होंगी।
  • कंपनियों की तैयारी:
    प्रभावित कंपनियां नियामक ढांचे का इंतजार कर रही हैं और कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही हैं।
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FAQs

1. कर्नाटक हाई कोर्ट ने बाइक टैक्सी सेवाओं पर क्यों रोक लगाई?
बाइक टैक्सी सेवाओं पर रोक गैर-परिवहन व्हाइट नंबर प्लेट वाली बाइकों के व्यावसायिक उपयोग और सुरक्षा चिंताओं के कारण लगाई गई है।

2. क्या यह रोक स्थायी है?
नहीं, यह रोक तब तक लागू रहेगी जब तक राज्य सरकार मोटर वाहन अधिनियम के तहत स्पष्ट दिशानिर्देश जारी नहीं करती।

3. क्या अन्य राज्यों में बाइक टैक्सियों की अनुमति है?
दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने बाइक टैक्सियों के लिए नियम बनाए हैं, लेकिन कर्नाटक में अब तक कोई स्पष्ट नीति नहीं है।

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