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भारतीय रुपया की मजबूती: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 34 पैसे की तेजी
शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 34 पैसे की जोरदार तेजी के साथ 84.96 पर पहुंच गया, जो दिसंबर 2024 के बाद पहली बार 85 के नीचे आया है। यह तेजी डॉलर में भारी गिरावट और वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बीच देखी गई। अमेरिकी शुल्क के प्रभाव के बाद डॉलर में व्यापक कमजोरी से रुपया सहित उभरते बाजारों की मुद्राओं को राहत मिली।
मुख्य बिंदु
- रुपया की तेजी:
- अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 85.07 पर खुला और बढ़त के साथ 84.96 प्रति डॉलर पर पहुंच गया।
- यह पिछले बंद भाव से 34 पैसे की बढ़त दर्शाता है।
- डॉलर सूचकांक:
- छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 101.64 पर रहा।
- यह डॉलर की कमजोरी को दर्शाता है।
- कच्चे तेल की कीमतें:
- अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.84 प्रतिशत लुढ़ककर 69.55 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा।
- कच्चे तेल की गिरती कीमतें भी रुपया की मजबूती में योगदान कर रही हैं।
- विदेशी निवेश:
- विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बृहस्पतिवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 2,806.00 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
- यह बिकवाली भी बाजार की स्थिति को प्रभावित कर रही है।
FAQs
1. शुक्रवार को रुपया की क्या स्थिति थी?
शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 34 पैसे की तेजी के साथ 84.96 पर पहुंच गया।
2. क्या डॉलर में गिरावट का कोई विशेष कारण था?
हां, डॉलर में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी शुल्क और वैश्विक मंदी की आशंकाएं थीं।
3. कच्चे तेल की कीमतों का क्या प्रभाव पड़ा?
कच्चे तेल की गिरती कीमतें भी रुपया की मजबूती में योगदान कर रही हैं।